गंगा से निकलीं तीन नहरें

गंगा से निकलीं तीन नहरें

दो सूखी और एक बहती ही नहीं

जो बहती ही नहीं

उसमें नहाने गए तीन पंडित

दो डूब गए और मिला ही नहीं

जो मिला ही नहीं

उसे मिलीं तीन गायें

दो बाँझ और एक ब्याही ही नहीं

जो ब्याही ही नहीं

उसने दिए तीन बछड़े

दो लंगड़े और एक उठा ही नहीं

जो उठा ही नहीं

उसकी क़ीमत तीन रुपये

दो खोटे और एक चला ही नहीं

जो चला ही नहीं

उसे देखने आए तीन सुनार

दो अंधे और एक को दिखता ही नहीं

जिसे दिखता ही नहीं

उसे पड़े तीन घूँसे

दो ख़ाली गए और एक लगा ही नहीं …

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