कुट्टा

जा तेरी मेरी पक्की कुट्टा
ज़िंदगी
अब तू मेरी दोस्त नहीं है दोस्त
अब नहीं कहूँगा
कुछ भी तुझसे
सच सच बता
क्यों कतरती है तू
मेरी चाहतें
ऊपर से
और नीचे से भी
बड़ी को किया छोटा
और
छोटी को किया
और छोटा ?
छोटा भी इतना
कि ना समाए
मुट्ठी में भी
क्या करूँगा लेकर
इतनी सी चाहतें भी
जा
वापिस रख ले
इन्हें भी तू
मुझ पर इतना भी एहसान क्यों
इनके बिना भी जी लूँगा मैं
मोहताज नहीं हूँ मैं
तेरी इन मेहरबानियों का
जा
अब किसी और को बहला
मैंने सीख लिया है जीना
तेरी दिलासाओं के बग़ैर
जा तेरी मेरी कुट्टा
पक्की कुट्टा

Leave a Reply

Your email address will not be published.

RELATED POST

ताश बनाम जिंदगी

सीख रहा हूं मैं भी अबताश खेलनाजिंदगी जैसा ही तो है यह खेलअगले पल क्या होगाकुछ पता नहींबेशक चलाकियां अक्सर…

टाइम

अच्छे लगते हैंरेस्टोरेंट या पार्क मेंटाइम फोड़तेलड़के और लड़कियांअच्छी लगती हैउनकी बेपरवाहीमन करता हैउन्हें करूं सचेतबताऊं उन्हेंअगले मोड़ पर खड़ा…

गंगा से निकलीं तीन नहरें

गंगा से निकलीं तीन नहरेंदो सूखी और एक बहती ही नहींजो बहती ही नहींउसमें नहाने गए तीन पंडितदो डूब गए…

सुनो भई गप-शप

सुनो भई गप सुनो भई शपके नदिया नाँव में डूबी जायसुनो भई गप सुनो भई शपके नदिया नाँव में डूबी…