हवा में गाँठ

रवि अरोड़ा
सचमुच देश बदल रहा है । अब तक गणेश जी को दूध पिलाने, मंकी मैन, बच्चा चोरी और गोहत्या जैसी अफ़वाहें ही हमें मशगूल रखती थीं मगर अब विशुद्ध प्रशासनिक मुद्दे भी अफ़वाहों की फ़ेहरिस्त में जगह बनाने लगे हैं । अब इस अफ़वाह को ही लीजिये कि उत्तर प्रदेश को तीन टुकड़ों में बाँटा जा रहा है और दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाएगा । बात यहीं नहीं थम रही और नोएडा, ग़ाज़ियाबाद, फ़रीदाबाद व गुड़गाँव दिल्ली का हिस्सा बनने की बात की जा रही है । नये प्रदेशों की ज़िलावार सूची भी आ गई है और आजकल सोशल मीडिया पर छाई हुई है । सब जानते हैं कि यह चंडूखाने की ख़बर है और इसमें सत्य का अंश भर भी नहीं है मगर फिर भी न जाने क्यों इसे आगे बढ़ाने में हर कोई मददगार हो रहा है। ख़बर की सत्यता जाँचने को मैंने भी अपने तई प्रयास किये और उत्तर प्रदेश और केंद्र सरकार के सभी अधिकारिक बयान, प्रेस नोट, ट्विटर हैंडल और वेब साईट खंगाल डालीं मगर कहीं एसी कोई ख़बर नहीं मिली । अब तो प्रदेश और केंद्र सरकार का बयान भी आ गया है कि एसा कोई प्रस्ताव उसके पास विचाराधीन नहीं है मगर फिर भी हर किसी को शक हो रहा है कि धुआँ उठा है तो शायद कहीं कोई चिंगारी भी हो । अब मैं भी बैठा हिसाब लगा रहा हूँ कि आख़िर यह अफ़वाह कहाँ से शुरू हुई होगी और इसका मंतव्य क्या है ? इसका लाभ किसको है और और किन हालात में यह परवान चढ़ी ?

अगले साल जनवरी-फ़रवरी में संभवतः दिल्ली विधानसभा के चुनाव होने हैं । जानकर बताते हैं कि वर्तमान मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की आप पार्टी का जलवा दिल्ली में अभी भी क़ायम है । उसकी सरकार की योजना मोहल्ला क्लीनिक की दुनिया भर में चर्चा हुई है । सरकारी स्कूलों की हालत में भी अभूतपूर्व सुधार हुआ है तथा बिजली पानी की दरों में भारी कटौती कर केजरीवाल सरकार ने अपनी स्थिति मज़बूत कर रखी है । लोगबाग कहते हैं कि वर्तमान स्थिति को देखते हुए दिल्ली राज्य में भी भाजपा की सरकार बनना मुश्किल है । अब चूँकि भाजपा नेतृत्व को हर बार हर जगह जीतने की आदत पड़ चुकी है और दिल्ली में भी वह हर सूरत अपनी सरकार चाहेगी । एसे में यदि दिल्ली को पूर्ण राज्य बनाया जाता है और उत्तर प्रदेश से मेरठ, बागपत, ग़ाज़ियाबाद, नोएडा, हापुड़ और बुलंदशहर तथा हरियाणा के सोनीपत, फ़रीदाबाद, रोहतक, झज्जर, गुरुग्राम, रिवाड़ी, नूह और पलवल जैसे भाजपा के प्रभाव वाले क्षेत्र दिल्ली में मिल जायें तो इस प्रदेश में भी भाजपा की सरकार बनने से कोई नहीं रोक सकता । मुझे लगता है कि इस अफ़वाह को खाद-पानी शायद इसी आकलन से सर्वाधिक मिला होगा ।

उत्तर प्रदेश को छोटा करने की माँग समय समय पर उठती रही है । बसपा सुप्रीमो मायावती तो प्रदेश के चार हिस्से करने का बक़ायदा प्रस्ताव भी केंद्र को अपने मुख्यमंत्रित्व काल में भेज चुकी हैं । राष्ट्रीय लोक़ दल की तो पूरी राजनीति ही पश्चिमी उत्तर को अलग राज्य बनाने यानि हरित प्रदेश के नाम पर चलती है । बुंदेलखंड से भी अलग राज्य की माँग काफ़ी पुरानी है । ख़ुद केंद्र सरकार की कई रिपोर्ट दावा कर चुकी हैं कि छोटे राज्य बनाने से प्रशासनिक चुस्ती आती है और विकास भी तेज़ी से होता है । इसके लिए हरियाणा और पंजाब का उदाहरण भी दिया जाता है । उत्तर प्रदेश को भी इसी नज़र से तीन हिस्सों में बाँटने की अफ़वाह शायद इस वजह से भी परवान चढ़ी हो ।

केंद्र की मोदी सरकार के बड़े फ़ैसलों से सहमत अथवा असहमत हुआ जा सकता है मगर यह तो हर कोई मानता है कि बड़े फ़ैसले लेने की कूव्वत तो इस सरकार में है । नोटबंदी , जीएसटी, बालाकोट और अब धारा 370 को निष्प्रभावी करने जैसे फ़ैसला लेकर इस सरकार ने यह साबित भी किया है । उत्तर प्रदेश और दिल्ली से जुड़े फ़ैसले की यह अफ़वाह इससे भी बलवती हुई कि इस सरकार में दम है और यह चाहे तो यह काम भी कर सकती है । वैसे घाघ लोग तो यह भी कह रहे हैं कि यह अफ़वाह भाजपा की आईटी फ़ैक्ट्री से ही निकली है । बक़ौल उनके हर मोर्चे पर असफल केंद्र सरकार हवा में गाँठ बाँध कर यह दिखाना चाहती है कि हम कुछ कर रहे हैं । हक़ीक़त में न सही ख़्वाब में ही सही । यूँ भी भीषण मंदी में लोगों का दिल बहलाने को ग़ालिब ख़याल अच्छा है । वैसे सच कहूँ तो यह अफ़वाह मुझे भी गुदगुदा रही है । काश एसा सचमुच हो जाये तो मैं भी बैठे बिठाए दिल्ली वाला हो जाऊँ । अब आप कह सकते हैं कि कान सीधा नहीं उल्टा पकड़ कर मैं भी तो इस अफ़वाह को फैलाने में मददगार हो रहा हूँ ।

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