राजनीति के ज़हर खुरानी

रवि अरोड़ा

एक दौर में विभिन्न अख़बारों में ज़िला एवं क्षेत्रीय प्रभारी होने के नाते संवाददाताओं की बीट का निर्धारण भी मुझे ही करना होता था । मेरा प्रयास होता था कि जीआरपी यानि रेलवे पुलिस की बीट क्राइम रिपोर्टर को न देकर हेल्थ रिपोर्टर को दी जाये । दरअसल उन दिनो रेलगाड़ियों में सहयात्रियों को ज़हरीलीव कोल्ड ड्रिंक अथवा बिस्कुट आदि खिला कर लूटने वाले ज़हरखुरानी गिरोह बहुत सक्रिय थे और उनका शिकार हुए लोगों को ज़िला अस्पताल में ही लाया जाता था और उसकी ख़बर हेल्थ रिपोर्टर की निगाह से बच नहीं पाती थी । आपको भी याद होगा कि दस पंद्रह साल पहले तक रेलगाड़ियों में खाने-पीने की वस्तुओं में ज़हर मिला कर यात्रियों को लूटने की ख़बरें अख़बारों में ख़ूब छपती थीं । मगर आज कल एसी ख़बरें ग़ायब हैं । पता नहीं लोग सयाने हो गये हैं जो ज़हर खिला कर लूटने वालों का शिकार नहीं बनते अथवा सारे ज़हर खुरानी गिरोह राजनीति में चले गये हैं ? मुझे तो दूसरी बात ज़्यादा ठीक लग रही है । राजनीतिक दलों में ज़हर खुरानी गिरोह नीचे से लेकर ऊपर तक आजकल दिख भी तो रहे हैं । दिल्ली राज्य के चुनावों में तो इन ज़हर खुरानियों को कुछ अधिक ही छूट मिल गई थी और बाक़ायदा ज़हर का मंथन भी हुआ । अब ज़हर के मंथन से कोरोना वायरस जैसा बेशक कुछ नहीं निकला मगर माहौल में जो बिखरा है वह भी किसी सुपर पॉयजन से कम है क्या ?

चुनावी भाषणों में ज़हर खुरानी दावा कर रहे थे कि ‘आप’ वाले आ गए तो समझो मुग़ल राज आ गया । दिल्ली का एक सांसद कह रहा था कि केजरीवाल जीता तो समझो पाकिस्तान जीत गया । एक बोला केजरीवाल आतंकवादी है । किसी ने घोषणा की कि आप की सरकार बनी तो हिंदुत्व और राष्ट्रवाद ख़तरे में पड़ जाएगा । एक केंद्रीय मंत्री अपनी जनसभा में नारे लगवा रहा था-देश के ग़द्दारों को, गोली मारो सालों को । एक सांसद कह रहा था कि यदि आप की सरकार बनी तो मुसलमान आपके घरों में घुस जाएँगे और आपकी बहु-बेटियों को उठा कर ले जाएँगे । शाहीन बाग़ को धुरी बना कर ज़हर का एसा अभूतपूर्व मंथन हुआ कि हर कोई भयभीत हो गया । मगर सलाम है दिल्ली के मतदाताओं को जो इस ज़हर की चपेट में नहीं आये । ज़हर खुरानी ज़हरीले बिस्कुट और कोल्ड ड्रिंक लेकर घर घर गए मगर उन्होंने बिस्कुट ले तो लिए मगर खाये नहीं ।

कई बार सोचता हूँ कि ये सोशल मीडिया भी कोई ज़हर खुरानी तो नहीं ? राजनीतिक दलों के आईटी और स्लीपर सेल्स ने इस बार जो दिलों में गंदगी मचाई है, वह आसानी से चली जाएगी क्या ? मोबाईल फ़ोन खोलो तो अधिकांश लोग ज़हरीला बिस्कुट हाथ में लिए खड़े मिलते हैं । हमारे टीवी चैनल्स तो इनसे दो क़दम आगे खड़े हैं । जिस भी चैनल पर जाओ , एंकर ज़हरीली कोल्ड ड्रिंक आपके मुँह से लगाने को तैयार बैठा है । दिल्ली के चुनाव परिणाम के सीधे प्रसारण में अधिकांश चैनल्स पर जिस तरह से भाजपा प्रत्याशियों को भगवा ( हिंदू प्रतीक ) और आप प्रत्याशियों को हरे ( मुस्लिम प्रतीक ) में दिखाया जा रहा है यह भी किसी ज़हरीले बिस्कुट से कम है क्या ? लाइव शो में भाजपा विरोधी एनडीटीवी के एंकर रवीश कुमार बात बात पर ठहाका लगा रहे थे और बाक़ी के तमाम चैनल्स के एंकर्स के यूँ मुँह उतरे हुए हैं कि जैसे उनके घर में कोई मौत हो गई हो । क्या इन्हीं लोगों के ज़िम्मे है लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा ?

शुक्र है ज़हर के इस मंथन में अमृत की कुछ बूँदे भी दिखाई दीं । ज़हर खुरानियों ग़ौर से सुनो आरएसएस के सर्वोच्च नेतृत्व में से एक भैया जी जोशी कह रहे हैं कि हिंदू होने का मतलब भाजपाई होना नहीं है और भाजपा को गाली देने का अर्थ भी हिंदुओं को गाली देना नहीं है । उधर संघ प्रमुख मोहन भागवत भी तो कह रहे हैं कि भारत में रहने वाले सभी लोग हिंदू हैं । क्या इनकी भी नहीं सुनोगे ? अरे ज़हर खुरानियों अब तो रुक जाओ । अब तो हमें चैन से जीने दो ।

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