मिश्र जी का जाना

अनुपम मिश्र जी अब नहीं रहे । वही अनुपम मिश्र जिन्होंने हम भारतीय को पानी का पाठ पढ़ाया । जल संरक्षण की बात हो तो मानना पड़ेगा कि इस विषय को मिश्र जी बेहतर शायद कोई नहीं जानता था । मेरा उनसे परिचय उनकी प्रसिद्ध पुस्तक ‘ आज भी खरे हैं तालाब ‘ के मार्फ़त हुआ । हालाँकि चाह कर भी उनसे कभी मुलाक़ात ना हो सकी । उन्ही से प्रभावित होकर हम कुछ लोगों ने ज़िले के तालाबों की सफ़ाई का काम ‘ मेघरतन ‘ संस्था के माध्यम से शुरू कराया था । शहर की पूर्व महापौर स्वर्गीय दमयंती गोयल जी का भी अपार सहयोग हमें मिला और थोड़ा बहुत काम भी हम लोग कर सके ।

कॉलेज के दिनो में भवानी प्रसाद मिश्र जी की कवितायें ख़ूब पढ़ा करते थे । बाद में पता चला कि अनुपम जी भवानी साहब की ही संतान थे । वैसे उन्होंने अपने पिता से भी अधिक प्रसिद्धि पाई और एक गांधीवादी विचारक के रूप में पूरे देश में जाने गए । समाज सेवी अनुपम जी का जाना मुझ जैसे उनके हज़ारों अनुयाइयो के लिए अचानक लगी किसी चोट के समान है । बेशक उन्हें श्रद्धांजलि देना औपचारिकता सा लगता है मगर एक सच्चे दिवंगत समाजसेवी के लिए तो स्वयं दिल ही श्रद्धांजलि अर्पित करता है ।

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