अच्छी नहीं है यह चुप्पी

रवि अरोड़ा
मेरे अनेक दोस्त मुस्लिम हैं। उदयपुर में दर्जी कन्हैया लाल की नृशंस हत्या की सभी ने निंदा और लानत मलानत की है। देश भर के मुस्लिमों लीडरान और बुद्धिजीवियों ने भी इस कांड की मजम्मत की है मगर हालात का तकाज़ा है कि आज के इस दौर में सिर्फ मजम्मत से बात नहीं बनती । बेशक मुस्लिमों के स्वंभू नेताओं को यह बात हज़म नहीं होगी मगर नबी के अपमान पर जुलूस निकालने से ज्यादा जरूरी अब हो चला है ऐसी वहशियाना हरकत का सार्वजनिक रूप से विरोध करना। मुल्क में अमन कायम रहे इसके लिए देश की बीस करोड़ मुस्लिम आबादी को हर वह काम करना होगा जिससे बहुसंख्यक आबादी हिंदुओं का विश्वास जीता जा सके । दिल दहला देने वाले इस कांड के बाद मुसलामानों का यह फर्ज़ भी है कि वह खुल कर बताएं कि वह ऐसी तालिबानी सोच के साथ नहीं है और हत्यारों को कड़ी सज़ा की दरयाफ्त भी उसे करनी चाहिए थी । बेशक सौहार्द की सारी जिम्मेदारी मुसलमानों की ही नहीं है मगर इस कांड के बाद तमाम जिम्मेदारियां उसी की ओर रुख कर रही हैं ।

उदयपुर कांड के बाद मुल्क का गुस्सा गैर वाजिब भी कैसे कहें? अहमकाना रवैया ही तो है कि आज जब दुनिया भर के मुस्लिम देशों में आधुनिक दुनिया से कदमताल की होड़ लगी हुई है वहीं भारत का मुस्लिम अपने मध्ययुगीनवादी लोगों की मुखालफत भी कायदे से नहीं कर पा रहा । सीरिया और अफगानिस्तान जैसे चंद देशों को छोड़ दें तो तमाम मुस्लिम देशों में आज दीन को इबादत की दहलीज तक ही महदूद रख व्यापार और आपसी संबंधों को तरजीह दी जा रहा है । तमाम मुल्ला मौलवी चाहे जितनी बकवास करें और शिर्क ( मूर्ति पूजा ) को सबसे बड़ा गुनाह करार दें मगर अब मुस्लिम देश सौहार्द के मद्देनज़र दूसरे धर्म की इबादतगाहों के लिए खुद आगे बढ़ कर जमीन उपलब्ध करा रहे हैं । इसी विचार के चलते यूएई की राजधानी अबू दाबी का निर्माणाधीन राम मंदिर इतना आलीशान बन रहा है कि एक हज़ार साल तक उसमें खरोंच भी नहीं आयेगी और आने वाले वक्त में वह दुनिया के सबसे भव्य मंदिरों में गिना जाएगा। बहरीन में भी ऐसा ही एक हिंदू मंदिर वहां का मुस्लिम शासक बनवा रहा है । बेशक बंटवारे में खून की नदियां वहां बहीं मगर अब पाकिस्तान को भी कुछ अक्ल आई है और वहां भी आतंकी वारदातें कुछ थमी हैं । सरकार किसी की भी हो मगर पाकिस्तान में अब हिंदुओं और उनके मंदिरों की हिफाजत की बात सभी को करनी पड़ती है । पाकिस्तान को साफ दिख रहा है कि तमाम मुस्लिम देश उसकी बजाय भारत की ओर अधिक झुक रहे हैं और कट्टरता का अब कोई भविष्य नहीं है । फिर ऐसा क्यों है कि भारत के कुछ मुसलामानों को यह बात समझ नहीं आ रही ?

बेशक आज देश में मुसलमानों के खिलाफ बड़े षड्यंत्र रचे जा रहे हैं मगर उनसे बचने की पहल तो खुद मुसलमानों को ही करनी होगी ना ? उसे कैसे समझ में आयेगा कि चुनाव से पहले उसे दरकिनार करने के षडयंत्र अब देश की राजनीति का प्रमुख अंग हैं ? देश के आधिकांश राज्यों में चुनाव से पहले जम कर हिंदू-मुस्लिम किया ही जाता है। चूंकि अब राजस्थान में चुनाव होने हैं सो अगला नंबर उसी का ही तो है। राम नवमी के दिन से ही इसका श्री गणेश वहां हो चुका है। पिछले दो दिन से जिस तरह से वहां के बड़े शहरों में जुलूस निकाले जा रहे हैं और खुद ही पुलिस कर्मी को मार कर मुसलमानों पर उसका आरोप मढ़ा जा रहा है, उसके बाद भी क्या कुछ समझना बाकी है ? आखिरी बात- यदि उसे वाकई अपनी सदाशयता साबित करनी है तो सबसे पहले उसे उदयपुर जैसे कांडों को अंजाम देने वाले अपनी ही कौम के दरिंदों से निपटना सीखना होगा । उससे कम पर बात नहीं बनेगी।

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