सुनो भई गप-शप

सुनो भई गप सुनो भई शप

के नदिया नाँव में डूबी जाय

सुनो भई गप सुनो भई शप

के नदिया नाँव में डूबी जाय

सुनो भई गप

सुनो भई शप

लौंग और इलायची नहाने चले

और इलायची ने मारी डुबकी

लौंग ज़ोर से रोने लगा

हाय हाय इलायची डूबी

सुनो भई गप

सुनो भई शप

चींटी मरी पहाड़ पर

और उठाने गए चर्मकार

नौ लाख जूतियाँ एक बनीं

और सैंडिल कई हज़ार

सुनो भई गप

सुनो भई शप

गधइया चढ़ी खजूर पर

और लगी नीबू गटकने

अरी उतर आ हरामखोर

कोई आया तेरे झुमके झटकने

सुनो भई गप

सुनो भई शप

( गीत काफ़ी बड़ा है मगर मुझे बस इतना ही याद है । किसी भाई को याद हो तो कृपया इसमें जोड़ दे )

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