टाइम

अच्छे लगते हैं
रेस्टोरेंट या पार्क में
टाइम फोड़ते
लड़के और लड़कियां
अच्छी लगती है
उनकी बेपरवाही
मन करता है
उन्हें करूं सचेत
बताऊं उन्हें
अगले मोड़ पर खड़ा है
टाइम
उन्हें फोड़ने को
फिर याद आते हैं
अपने जीवन के वे सभी खलनायक
जिन्होंने टोका था मुझे कभी
फिर ठिठक जाता हूं मैं
और मुस्कुरा देता हूं
उन्हें यूं टाइम फोड़ते देख कर
रवि अरोड़ा

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

RELATED POST

चाय

चायएक मैं फीकी चाय नहीं पीतादूजा मैं ठंडी चाय नहीं पीताजिस चाय में चाह न होजी मैं ऐसी चाय नहीं…

पुण्य

पुण्यतुम्हें शर्तिया मिलेगा पुण्यजमीन पर गिरे किसी शरीर कोकुचलते तुम्हारे पांवयकीनन तुम्हें ले जाएंगेस्वर्गों तक ।आदमी को मसलता आदमीही तो…

ताश बनाम जिंदगी

सीख रहा हूं मैं भी अबताश खेलनाजिंदगी जैसा ही तो है यह खेलअगले पल क्या होगाकुछ पता नहींबेशक चलाकियां अक्सर…

गंगा से निकलीं तीन नहरें

गंगा से निकलीं तीन नहरेंदो सूखी और एक बहती ही नहींजो बहती ही नहींउसमें नहाने गए तीन पंडितदो डूब गए…