सास बहू या किसान

दोपहर के तीन बजे हैं । सोशल मीडिया पर ख़बरें आ रही हैं कि दिल्ली बोर्डर पर आंदोलनरत किसानों पर लाठियाँ और पानी की बौछारें पड़ रही हैं । बड़ी बेचैनी से टीवी के चैनल बदल रहा हूँ मगर वहाँ तो किसानों की ख़बरें सिरे से ग़ायब हैं । एनडीटीवी स्वच्छ बनेगा भारत दिखा रहा है तो एबीपी पर सास बहू और साज़िश चल रहा है । आज तक पर सास बहू और बेटियाँ का प्रसारण हो रहा है और इंडिया टीवी पर सास बहू और सस्पेंस व इंडिया टीवी पर सास बहू फ़ैमिली गुरु जैसा वाहियत कार्यक्रम आ रहा है । बेचैनी में बार बार न्यूज़ चैनल बदल रहा हूँ मगर कहीं बिग बॉस तो कहीं पाँच पाँच मिनट से लगातार विज्ञापन आ रहे हैं । किसानों के सिर फोड़ कर गांधी जयंती मना रही केंद्र सरकार को किसानों के दिल्ली पहुँचने पर ही वार्ता की क्यों सूझी , यह जानने को बेताब हूँ मगर यहाँ तो सभी प्रमुख न्यूज़ चैनल इतने महत्वपूर्ण मुद्दे की जानबूझकर कर आपराधिक उपेक्षा कर रहे हैं । अब समझ नहीं आ रहा कि ग़ुस्से में भरा मैं अपना सिर फोड़ लूँ या इस टीवी को फ़ोड़ दूँ …

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