सलाम राम्या

रवि अरोड़ा

निजी तौर पर पाकिस्तान के हालात मुझे भी नर्क से बदतर नज़र आते हैं । पहले दिन से ही वह हमारा विश्वासघाती पड़ोसी है । बावजूद इसके हमारे रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने जब उसे नर्क बताया तो मुझे अटपटा लगा । पर्रिकर आम आदमी नहीं हैं । विदेश मंत्री के नाते उनसे कूटनीतिक भाषा की ही उम्मीद की जाती है । चलिए फिर भी बोल दिया तो बोल दिया । लीजिए हम भी बोल देते हैं कि पाकिस्तान नर्क है । लेकिन यह क्या ? जो नहीं बोलेगा उसे फाँसी दोगे ? जो कहेगा कि पाकिस्तान नर्क नहीं है , उसपर देशद्रोह का मुक़दमा चलाओगे ? फ़िल्म अभिनेत्री राम्या ने क्या ग़लत किया ? क्या यह उनका संवैधानिक हक़ नहीं है कि वह उस देश के बारे में अपने अनुभव लोगों से बाँटे जहाँ से वे अभी होकर आई हैं ? पाकिस्तान को यूँ भी हमने दुश्मन देश कब घोषित किया है ? दुश्मन ही है तो हमारे प्रधानमंत्री बिना बुलाए वहाँ क्यों गए ? क्यों साड़ी भेंट की ? क्यों दुश्मन देश के प्रधानमंत्री की माँ के पाँव छूए ? जब प्रधानमंत्री गए थे तो उनके लोगों ने दावा किया था कि भारत की यह बड़ी कूटनीतिक विजय है । पब्लिक से भी उम्मीद की गई थी कि वह ज़िंदाबाद-ज़िंदाबाद करे । अब नर्क वाले बयान पर भी हमसे यही उम्मीद की जा रही है । अरे भाई अब यह कौन सी कूटनीति हो रही है ? ज़रा कोई हमें भी तो समझाओ ।

मोदी सरकार की यही दिक़्क़त है । उसे हर बात पर वाह वाह चाहिए । सवाल उसे पसंद नहीं । कोरी भावुकता के घोड़े पर सवारी करते करते वह जनता जनार्दन से भी यही उम्मीद करती है । पहले पाकिस्तान से दोस्ती और गलबहियों का प्रदर्शन और फिर बलूचिस्तान और नर्क वाला बयान । अरे भाई या घोड़ा-घोड़ा बोलो या चतुर -चतुर कहो । ये घोड़ा चतुर- घोड़ा चतुर क्या लगा रखा है ? चलिए माना इसने भी आपकी कोई कूटनीति होगी मगर हर बात पर हमसे हाँ बुलवाना क्यों चाहते हो ? यदि किसी ने पाकिस्तान को नर्क नहीं कहा तो कौन सा आसमान टूट जाएगा ? पाकिस्तान जिस भूमि पर खड़ा है उसे अखंड भारत का हिस्सा मानते हैं आपके नीति निर्धारक । पाकिस्तान और भारत के महासंघ की कल्पना आपके दीनदयाल उपाध्याय जी ने ही की थी । नर्क के प्रति एसे भावो के लिए अपने महापुरुषों से भी क्या अब कोई सवाल-जवाब आप करेंगे ? मुआफ़ी के साथ कहना चाहूँगा कि कोरी भावुकता की बुनियाद पर खड़ी यह नवराजनीतिज्ञो की टोली ना इतिहास जानती है और ना ही भूगोल । उसे तो बस ज़िंदाबाद और मुर्दाबाद करना ही आता है । असहमति से उन्हें चिड़ है । तर्क उनकी समझ में नहीं आते । हर एक तर्क का उनके पास एक ही जवाब है-भारतमाता की जय। अरे भाई कौन है यह भारत माता ? कभी यह जानने की कोशिश तो करो । जिसे तुम देश प्रेम कह रहे हो यह देश प्रेम नहीं कुछ और है भाई । एसा डरा हुआ राष्ट्रवाद हमें कहीं नहीं ले जाएगा । पत्ता खड़के और हमारे देश प्रेम के सामने चुनौती खड़ी हो जाए तो यह देश प्रेम की कोई मलूक सी क़िस्म ही होगी जी । चार दिन पहले तक मैंने राम्या का नाम भी नहीं सुना था । हो सकता है इतिहास में उसके लिए कोई जगह भी ना हो मगर उस सोच के बिना इतिहास लिखे भी नहीं जाते जो राम्या जैसे लोग लेकर बाँटते हैं । सलाम राम्या ।

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