लगता है नोटबंदी

लगता है नोटबंदी को जनता ने स्वीकार कर लिया है । शायद यही कारण है कि इतने बड़े फ़ैसले के बावजूद देश में कोई बड़ा तूफ़ान नहीं आया मगर क्या सारी क़ुर्बानी जनता से ही ली जानी चाहिए थी अथवा बड़े औद्योगिक घरानों और राजनीतिक दलों पर भी कोई नकेल होगी । आइए आज इसी मुद्दे पर बात कर लें ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

RELATED POST

अविश्वास तेरा ही सहारा

रवि अरोड़ादस साल के आसपास रही होगी मेरी उम्र जब मोहल्ले में पहली बार जनगणना वाले आये । ये मुई…

पैसे नहीं तो आगे चल

रवि अरोड़ाशहर के सबसे पुराने सनातन धर्म इंटर कालेज में कई साल गुज़ारे । आधी छुट्टी होते ही हम बच्चे…

एक दौर था

एक दौर था जब बनारस के लिए कहा जाता था-रांड साँड़ सीढ़ी और सन्यासी , इनसे जो बचे उसे लगे…

चोचलिस्टों की दुनिया

शायद राजकपूर की फ़िल्म 'जिस देश में गंगा बहती है ' का यह डायलोग है जिसने अनपढ़ बने राजकपूर किसी…