या तो नूई चाल्लेगी

रवि अरोड़ा
मैं नज़ूमी नहीं हूँ । भविष्यवाणी के बाबत मैं कुछ भी नहीं जानता मगर हाल ही में एसा कुछ हुआ कि मुझे विश्वास हो चला है कि यदि मैं इस क्षेत्र में आता तो ज़्यादा सफल होता । अजी वक़्त ही ख़राब था जो खामखाह क़लम घसीटू बन गया । जनाब मैं बात कर रहा हूँ दिल्ली के बड़े नेता कपिल मिश्रा की , जिन पर आरोप था कि उनके भड़काऊ बयान से राजधानी में दंगे हुए और 48 लोग मारे गये । हाल ही में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने अपनी जो चार्जशीट पेश की है उसमें मिश्रा का ज़िक्र तक नहीं है ।दरअसल मुझे पहले से ही मालूम था कि कपिल मिश्रा का बाल भी बाँका नहीं होगा और यही हुआ भी । हाँ इस बात की ज़रूर हैरानी हुई कि चार्जशीट में 23 फ़रवरी को जाफराबाद के मौजपुर चौक पर मिश्रा की उस सभा का ज़िक्र ही नहीं किया गया जिसके बाद दंगा भड़का । इसी सभा में पुलिस की मौजूदगी में कपिल मिश्रा ने दिल्ली पुलिस को चेतावनी दी थी कि तीन दिन में सीएए के ख़िलाफ़ धरना दे रहे लोगों को हटा लो वरना परिणाम ख़तरनाक होंगे । चार्जशीट में जामिया मिलिया में हुई तोड़फोड़ और सीएए विरोधी प्रदर्शनकारियों का तो विस्तार से उल्लेख है मगर कपिल मिश्रा को साफ़ बचा लिया गया । क्या अब भी आपको विश्वास नहीं होता कि मैंने सचमुच नज़ूमियों वाला काम किया है ? वैसे सच कहूँ तो मेरी भविष्यवाणी इस लिए सही साबित हुई क्योंकि मैं भाजपा को समझता हूँ और इसी वजह से मैंने तभी कह दिया था कि कपिल मिश्राओं का नहीं दोष गोसाई ।
अब आप कह सकते है कि मैं आज कुछ डींगें हाँक रहा हूँ और बाबरी मस्जिद और गुजरात समेत भाजपा शासित राज्यों में हुए तमाम दंगों को खुली आँख से देखने वाला कोई भी व्यक्ति एसी भविष्यवाणी कर सकता है । चलिये मान लिया कि आप भी नज़ूमी हैं मगर यह तो बताइये कि यदि कपिल मिश्रा वापिस अपनी मूल आम आदमी पार्टी में चले जायें तो कितने दिन में गिरफ़्तार हो जाएँगे ? हो सकता है कि आपका अनुमान हो कि एसा दो दिन में हो जाएगा मगर आप यहीं मात खा जाएँगे । कपिल मिश्रा ने साम्प्रदायिकता की जो राह चुनी है उसके लिए अब सुनहरा भविष्य बाँहें फैलाए खड़ा है , आम आदमी पार्टी में फिर से गये तो ढक्कन ही हो जाएँगे न । लीडर लौंड्री यानि नेता शोधन पार्टी भाजपा से धुल कर अपने सभी दाग़ धब्बे हटवाने के बाद कोई एसी ग़लती भला क्यों करेगा ?
लीडर लौंड्री पार्टी शब्द के लिए आप मुझसे ख़फ़ा हो सकते हैं मगर यह शब्द आज यूँ दिमाग़ में तब आया जब अचानक स्वर्गीय सुखराम जी की याद आ गई । केंद्रीय मंत्री रहते हुए सुखराम ने जब टेलीकाम घोटाला किया था तो भाजपा ने कमीशन शब्द को ही सुखराम टैक्स कहना शुरू कर दिया था । यही नहीं इस घोटाले के भंडाफोड़ होने के बाद दो सप्ताह तक भाजपा ने संसद भी नहीं चलने दी थी । मगर आख़िरी दिनो में वही सुखराम भाजपा मे आकर धुले धुलाए हो गए थे । दो साल पहले तक भाजपा नरेश अग्रवाल के नाम से भी चिढ़ती थी । संसद में हिंदू देवी देवताओं पर बेहूदा टिप्पणी पर भाजपा ने उन पर महाभियोग चलाने की भी माँग की थी मगर अब इसी भाजपा की गंगा में डुबकी लगा कर नरेश अग्रवाल पवित्र हो गये हैं । किस किस का नाम लें । एसोसिएशन आफ डेमोक्रेटिक एलायंस के अनुसार वर्तमान 39 फ़ीसदी भाजपाई सांसद दाग़ी हैं । पार्टी के 116 सांसदों पर मुक़दमे लम्बित हैं । कुल 64 पार्टी सांसदों पर गम्भीर आपराधिक मामले दर्ज हैं । महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराधों के मामले में भी पार्टी के सांसद सबसे आगे है । पिछली तीन संसदों में ही 44 फ़ीसदी अधिक दाग़ी लोग सांसद बने हैं ।
हाल ही में फ़ेसबुक के सीईओ मार्क ज़करबर्ग ने अमेरिका के ताज़ा दंगों के परिप्रेक्ष्य में अपने कर्मचारियों से हेट स्पीच पालिसी पर चर्चा की और दंगा भड़काने वाले भाषणों के संदर्भ में कहा दिल्ली के मौजपुर चौक पर कपिल मिश्रा के भाषण का भी ज़िक्र उनका नाम लिए बिना किया । मार्क के वक्तव्य से साफ़ हो गया कि दुनिया की हमारे नेताओं के बारे में क्या राय है मगर हमें इससे क्या ? हमारे मुल्क की राजनीति तो नूई चाल्लेग़ी ।

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