बदल रही हैं लड़कियां

रवि अरोड़ा
यदि मैं आपके कहूं कि देश की लड़कियां बदल रही हैं तो आप यकीनन यही कहेंगे कि बिलकुल बदल रही हैं । यदि मैं फिर कहूं कि उम्मीद से भी अधिक तेजी से लड़कियां बदल रही है तो आप शर्तिया झल्लाएंगे और पूछेंगे कि मैं आखिर कहना क्या चाहता हूं ? अब यदि आपके इस प्रश्न के उत्तर में मैं लड़कियों से संबंधी आंकड़े पेश करने की बजाय अपने एक कारोबारी मित्र की व्यथा आपको सुनाना चाहूं तो क्या आप हैरान नहीं होंगे ? तो चलिए मेरे मित्र की कहानी सुनिए ।

मेरा यह मित्र ( अजी नाम में क्या रखा है ) नोएडा में रेडीमेड गारमेंट्स का कारोबार करता है । फैशन के अनुरूप स्त्री पुरुषों के कपड़े तैयार कर उसे ऑनलाइन बेचना ही उसका व्यापार है । तीन दिन पहले उससे बात हुई तो उनसे अपना अजब दुखड़ा सुनाया । बकौल उसके आजकल एक नया ट्रेंड शुरू हुआ है कि युवा वर्ग और उसमें भी अधिकतर लड़कियां ऑनलाइन ऑर्डर कर मनपसंद कपड़े मंगाती हैं और फिर पार्टी आदि में एक बार पहन कर वापिस कर देती हैं । चूंकि नियमानुसार कपड़ा पसंद न आने पर एक सप्ताह तक उसे निशुल्क वापिस करना उनका अधिकार है सो हम उसमें कुछ नहीं कर पाते और हमें कपड़ा भेजने, वापिस मंगाने व पैकिंग समेत अन्य खर्चों का नुकसान उठाना पड़ता है । कुछ युवा और उनमें भी लगभग 90 फीसदी लड़कियां तो इससे भी आगे निकल जाती हैं और वे नए कपड़े मंगवा कर पुराने फटे कपड़े वापिस भेज देती हैं और हम कुछ नहीं कर पाते । दरअसल घरौंदा आश्रम संबंधी मेरे लेख के बाद मित्र का फोन इस आश्रम का पता पूछने को आया था । बकौल उनके उसकी फैक्ट्री में तैयार माल रखने की जगह कम हो गई है और इस्तेमाल करके वापिस भेजे हुए कपड़ों के बोरे ही सारी जगह घेरे हुए हैं और वे अब इन्हें किसी को देना चाहते हैं । उसकी बात सुन कर पहले तो हंसी आई मगर जब उसने बताया कि हाल ही में लगाए गए हिसाब के अनुसार उसकी साल भर की बिक्री में 23 फीसदी ऐसी फर्जी बिक्री ही थी तो सुन कर बड़ी हैरानी हुई कि ये क्या हो रहा है ? छुईमुई सी हमारी लड़कियां क्या इतनी चंट चालाक हो गई हैं ? क्या सचमुच यह चालाकी भर है या कोई साइबर क्राइम है ? और यदि क्राइम है तो किस ओर जा रही है हमारी लड़कियां ? मित्र की बात की तस्दीक को ऑनलाइन गारमेंट्स सप्लाई करने कुछ और लोगों से बात की । उन्होंने भी यही दुखड़ा रोया । किसी का आंकड़ा इससे थोड़ा कम था तो किसी का और भी ज्यादा । हालांकि इतना नुकसान उठाने के बाद भी वो लोग व्यापार कर रहे हैं तो जाहिर है मुनाफा काफी अच्छा होगा मगर उनकी बैलेंस शीट बनाने की बजाय मेरी रुचि तो लड़कियों के बदलते स्वभाव में है , अतः उसी की बात कर रहा हूं ।

हमारी दुनिया बहुत तेजी से बदल रही है । जाहिर है लड़कियों के स्वभाव में भी परिवर्तन आना अवश्यंभावी है । पढ़ाई और करियर के मामले में ही नहीं परिवार और समाज के मोर्चे पर भी उन्होंने सफलता के झंडे गाड़े हैं । कई मामलों में तो उन्होंने प्रतिस्पर्धा में पुरुषों को भी पीछे दिया है मगर चालाकी के मामले में भी पुरुषों की बराबरी करने की होड़ उन्हें कहां ले जा रही है ? चलिए बराबरी तक भी रुक जाएं तो गनीमत है मगर ये तो उनसे भी आगे बढ़ रही हैं । फेसबुक और इंस्टाग्राम आदि पर नए नए आउटफिट के साथ तस्वीरें साझा करने को किसी के साथ धोखाधड़ी करना कहां तक जायज है ? उनके डेट पर जाने और बिला वजह मॉल और बाजारों में सजधज कर घूमने की कीमत कोई बेचारा व्यापारी क्यों भुगते ? स्ट्रीट स्मार्टनेस के नाम पर हम अपनी बच्चियों को क्या संस्कार दे रहे हैं ?

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