दीप सिद्धू घर लौट आओ

रवि अरोड़ा
पहले शक होता था मगर अब पक्का विश्वास हो चला है कि सारे क़ायदे-क़ानून केवल आम आदमी के लिए ही हैं और जुगाड़ वालों का कभी कुछ नहीं बिगड़ता । हालाँकि गोस्वामी तुलसी दास जी तो चार सौ साल पहले ही कह गये थे- समरथ को नहीं दोष गोसाई मगर मेरे जैसे नासमझ लोग इसे हमेशा कोरा साहित्य जी समझते रहे । अब इस कुख्यात दीप सिद्धू को ही लीजिये । गणतंत्र दिवस के अवसर पर दिल्ली के लालक़िले में तिरंगे का अपमान करने वाले इस बंदे का अभी तक कोई बाल भी बाँका नहीं कर सका। बेशक कहने को दिल्ली पुलिस ने उस पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित कर दिया है मगर उसकी गिरफ़्तारी को पुलिस ने अब तक क्या गम्भीर प्रयास किये , यह किसी को नहीं पता । पुलिस तो पुलिस सरकारी भजन मंडली यानि टीवी चैनल्स भी अब सिद्धू की बात नहीं करते । अब उनकी अपनी मजबूरी है । जब से नरेंद्र मोदी, अमित शाह और भाजपा को तीन तीन सांसद देने वाले सुपर स्टार धर्मेंद्र, हेमा मालिनी तथा सनी देओल के परिवार के साथ सिद्धू की तस्वीरें सामने आई हैं , इन चैनल वालों की भी घिग्गी बंध गई है । दिल्ली पुलिस के हाथ भी शायद इन तस्वीरों ने बाँध दिये हैं । दीप सिद्धू ही क्यों , अर्नब गोस्वामी का भी क्या हुआ ? देश की सुरक्षा से जुड़ी सर्जिकल स्ट्राइक जैसी ख़बर लीक करने वाले इस कथित पत्रकार की गिरफ़्तारी तो दूर , उससे पूछताछ तक नहीं की गई । तबलीगी जमात के मौलाना साद को पुलिस तो क्या अब आम जनता भी भूल चुकी है । कोरोना संकट के समय भजन मंडली ने मौलाना को देश का सबसे बड़ा दुश्मन बताया था मगर गिरफ़्तारी तो दूर उससे आज तक पूछताछ तक नहीं हुई । सॉरी तुलसी दास जी ! आपकी बात बहुत देर में समझ आई ।

दीप सिद्धू पहले वक़ील था , फिर मॉडलिंग करने लगा । चार साल पहले धर्मेंद्र की निगाह में चढ़ा तो उन्होंने इस जट सिख को लेकर एक फ़िल्म बना डाली-रमता जोगी । हम बिरादर होने के कारण देओल परिवार में सिद्धू की सीधी एंट्री हो गई । इसी बीच लोकसभा चुनाव आ गये और भाजपा ने सनी देओल को गुरदासपुर से टिकिट दे दिया । जाट मतदाताओं को साधने के लिये सनी देओल ने सिद्धू को अपना चुनाव प्रभारी बना लिया । चुनाव जीते तो मोदी और अमित शाह से भी मिलवा लाये । ये तस्वीरें भी शायद तभी की हैं मगर बात करने वालों को तो शायद यही बहुत हैं । सारा विपक्ष कह रहा है कि सिद्धू सत्ता का क़रीबी है और मोदी सरकार ने किसान आंदोलन को ख़त्म कराने के लिये ही सिद्धू के कंधे पर रख कर बंदूक़ चली थी । बात कितनी सच है अथवा कितनी झूठ यह तो पता नहीं मगर दिल्ली पुलिस और भजन मंडली तो शायद इसे सच ही मान रही है सो सिद्धू को जल्द से जल्द भुलाने की कोशिशें की जा रही हैं । सही मौक़ा देख कर उसका सरेंडर और फिर ज़मानत करवाई जाएगी और फिर बात हमेशा के लिए ख़त्म । यदि ऐसा नहीं है तो यह कैसे सम्भव है कि इलेक्ट्रोनिक सर्विलांस के ज़माने में कोई आदमी सोशल मीडिया पर सुबह शाम एक्टिव हो और पुलिस कहे की वह हाथ नहीं आ रहा ?

अभी पिछले दिनो संसद में एक केंद्रीय मंत्री ने स्वीकार किया था 31 बड़े उद्योगपति और व्यापारी देश को अरबों रुपयों का चूना लगा कर पिछले कुछ वर्षों में विदेश भाग चुके हैं । विजय माल्या, नीरव मोदी और मेहुल चोकसी जैसे इन घोटालेबाज़ों के वीडियो आये दिन सामने आते हैं कि कैसे वे लंदन, दुबई और अमेरिका में मौज कर रहे हैं । पता नहीं अभी और कितने ऐसे बड़े लोग हैं जो देश को चूना लगा कर भागने की तैयारी में हैं । इनमे से शायद ही किसी का कुछ नहीं बिगड़ेगा । ज़्यादा से ज़्यादा चार दिन ख़बरों में छाये रहेंगे और फिर सब लोग भूल जाएँगे । रही बात दीप सिद्धू की तो इंतज़ार कीजिये । किसी दिन अख़बार में दिल्ली पुलिस का ऐसा कोई विज्ञापन ही दिखेगा- दीप बेटे कहाँ हो ? घर लौट आओ । कोई तुम्हें कुछ नहीं कहेगा ।

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