क्या आप भी वेल्ले हैं

रवि अरोड़ा
आज रविवार है सो धुर वेल्ला हूँ । वैसे इक्कीस दिन के लॉकडाउन के चलते आजकल रोज़ ही वेल्ला हूँ मगर इतवार का वेल्लापना तो कुछ ख़ास ही होता है न । कहना चचा ग़ालिब का- जी ढूँढ़ता है फिर वही फ़ुर्सत के रात दिन , बैठे रहें तसव्वुर-ए-जानाँ किए हुए । सो आज का पूरा दिन तसुव्वर के नाम । तसुव्वर में जाना न सही बिग बॉस ही सही । ख़ूब ख़याली घोड़े दौड़ा रहा हूँ कि दीया जलाने से कोरोना वायरस कैसे सरपट भागेगा और कल्पना कर रहा हूँ कि आज शाम को दीया जलाने के बाद भी यदि कोरोना ढीठ बना रहा तो बिग बॉस हमें अगला एसाईनमेंट क्या दे सकते हैं ? यह तो मैं जानता ही हूँ कि हमारे बिग बॉस ने बाक़ी सारे इंतज़ाम कर ही रखे होंगे और अब तो बस हमें भी हिल्ले लगा रहे हैं । वे ज्ञानी-ध्यानी आदमी हैं और सब कुछ योजनाबद्ध तरीक़े से ही करते हैं और आगे की योजना उनके दिमाग़ में पहले से ही होगी । ज़ाहिर है कि हमारे आपके सोचने से उनकी योजना पर कोई असर भी नहीं पड़ना है मगर मैंने तो पहले ही कहा न कि आज धुर वेल्ला हूँ और यूँ भी मुल्क में अभी तक ख़याली पुलाव बनाने पर कोई रोक टोक नहीं है । अब यह तो आप भी मानेंगे कि ख़याली पुलाव बनाना तो हम भारतीयों का जन्मसिद्ध अधिकार ही है ।
इतवार की फ़ुर्सत का दिमाग़ कहता है कि ख़याली पुलाव बनाना हमने पौराणिक काल से भी सीख लिया होगा । हमारे तमाम पुराण और दंत कथाएँ इनकी सबसे बड़ी मिसाल ही तो हैं । मेरे ख़याल से भागवत पुराण, महाभारत और विष्णु पुराण में उल्लेखित समुंद्र मंथन की कथा इनमे मील का पत्थर ही होगी । मंथन में हम सब कुछ देने वाली गाय कामधेनु , सात सिर वाले उच्चै : श्रवा घोड़े , चार दाँत वाले एरावत हाथी, सभी विपदाएँ हरने वाली कौस्तुय मणि , हर इच्छा पूर्ण करने वाले कल्पवृक्ष और अमृत जैसी कल्पनाएँ करते हैं । यही नहीं हम तो किसी नाग के सिर पर भी मणि का तसुव्वर करते रहते हैं । कहानियों में अपनी तमाम विपदाओं और समस्याओं के हल ढूँढने की हमारी इसी ख़्वाहिश ने मिडिल ईस्ट की कल्पना अलादीन और जादुई चिराग़ से भी एसा जोड़ा कि अलादीन अब हमें अपने मोहल्ले का ही कोई लड़का लगता है । आसपास कहीं गड्ढा ख़ुद रहा हो तब हम यूँ ठिठक जाते हैं कि शायद कोई गड़ा ख़ज़ाना हमें दिख जाये । पहले थाली-ताली बजाने और अब दीया-मोमबत्ती जलाने से कोरोना पर विजय की हमारी यह कल्पना भी हमें अपने पूर्वजों से बख़ूबी जोड़ती नज़र आती है ।
मानना पड़ेगा बिग बॉस को । उन्हें अच्छी तरह पता है कि हम कर्मकांडी हैं सो हर हफ़्ते किसी न किसी कर्मकांड में लगा देते हैं । मेरा तो यह भी विश्वास है कि वे मेडिकल साइंस भी जानते हैं और प्लासिबो इफ़ेक्ट से हमारा इलाज कर रहे हैं । बस एक डर लग रहा है कि यह दीया जलवाना उस तरह का न हो जैसा फ़िल्मों में डाक्टर कहते हैं कि हम जो कर सकते थे वो हमने कर दिया , अब तो आप ईश्वर से प्रार्थना करो ।
ख़ैर फिर कल्पना पर लौटना हूँ और सोचता हूँ कि बिग बोस का अगला एसाईनमेंट क्या हो सकता है ? डर लग रहा है कि अगली बार वे बस यह न कह दें कि आज फ़लाँ तारीख़ है और फ़लाँ बजे इतने मिनट तक बालकनी में आकर अपना अपना साँस रोकें । इससे ओक्सीजन न मिलने से कोरोना वायरस अपने आप मर जाएगा । अब मेरी तरह यदि आप भी वेल्ले हों तो आप भी अगले एसाईनमेंट की कल्पना कीजिये ।

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