कुछ यूं भी याद आएंगी

रवि अरोड़ा
लता जी के न रहने की खबर बेशक दुखदायी है मगर पूर्व अपेक्षित भी थी । वह 92 साल का भरा पूरा जीवन बिता कर दुनिया से गईं और पिछले कई महीनों से बीमारी के चलते जीवन का आनंद भी नहीं ले पा रही थीं । इस अफसोसनाक खबर के साथ कुछ ऐसी बातें भी पिरो कर आईं जिनसे कुछ राहत महसूस हुई । यह देख कर अच्छा लगा कि हमारी सरकारों ने भी विदाई के समय उन्हें उचित सम्मान दिया और तमाम वह फर्ज़ निभाए जिसकी उनसे उम्मीद की जाती थी । लता जी के सम्मान में देश के झंडे को झुकाना और राजकीय सम्मान के साथ उनके अंतिम संस्कार जैसी बातें दिल को छू गईं । यह भी अच्छा हुआ कि उनके जीवन काल में ही देश ने भारत रत्न समेत वह तमाम बड़े सम्मान भी दे दिए जिनकी वह हकदार थीं । वह इकलौती भारतीय हैं जिनके हिस्से पद्म पुरस्कारों के साथ दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड और देश का सबसे बड़ा सम्मान भारत रत्न आया । यदि इनमें से कोई भी अवार्ड उन्हें भेंट करने से देश चूक जाता तो यकीनन नोबल पुरस्कार वालों की तरह पछताता । दुनिया जानती है कि समय रहते महात्मा गांधी को सम्मानित न करके की भूल के चलते नोबेल वालों को एक साल के लिए पुरस्कार स्थगित ही करना पड़ा था ।

लता मंगेशकर जी की दुनिया से विदाई की खबर के साथ एक हैरान कर देने वाली खबर भी नत्थी हो कर आई । भारत के साथ साथ आसपास के देशों ने भी उनकी मृत्यु का शोक मनाया । पाकिस्तान की अवाम के बीच तो यह आज की सबसे बड़ी खबर बन कर उभरी । सोशल मीडिया पर लता जी को श्रद्धांजलि अर्पित करने के संदेशों के साथ साथ लोग बाग उनके गीत भी शेयर कर रहे हैं । सबको पता है कि पाकिस्तान की जनता भारतीय सिनेमा और खास कर बालीवुड की कितनी दीवानी है । हमारे फिल्मी सितारे ही नहीं हमारे संगीतकार , गायक और प्रोडक्शन के लोग भी वहां घर घर जाने पहचाने जाते हैं । इस्लामिक उसूलों पर चलने के बावजूद पाकिस्तानी अवाम मौसिकी के जबरदस्त कद्रदान है । इसी के चलते लता मंगेशकर के गीत वहां बच्चे बच्चे की जबान पर रहते हैं । उनके गीत स्टेज पर गा गाकर न जाने कितनी गायिकाओं के परिवार पल रहे हैं ।

भारतीय फिल्मी कलाकारों के प्रति पाकिस्तान के लगाव का एक बड़ा कारण यह भी है कि दिलीप कुमार , राज कपूर, देव आनंद और सुनील दत्त जैसे दर्जनों बड़े सितारों का जन्म उसकी सरजमीं पर ही हुआ था । समय समय पर ये लोग वहां जाते भी रहे और वहां की अवाम ने उन्हें सर आंखों पर भी बैठाया । दिलीप कुमार को तो वहां की सरकार ने अपने सबसे बड़े नागरिक सम्मान निशान ए इम्तियाज़ से भी नवाजा । हालांकि आज भी बॉलीवुड में ऐसे अनेक कलाकार हैं जिनका जन्म सरहद के उस पार हुआ मगर यह गिनती अब धीरे धीरे कम हो रही है । जाहिर है कि ऐसे लोगों के न रहने का खामियाजा आपसी दोस्ताने को भी भुगतना पड़ता है । ये कलाकार दोनो मुल्कों के बीच पुल का ही काम करते हैं और दिल्ली व इस्लामाबाद से पैदा हुई गर्म हवाओं को ठंडी हवा के झोंकों में तब्दील करते हैं । लेकिन लता जी तो पाकिस्तान की जमीन पर पैदा नहीं हुईं , फिर उनको लेकर इतना क्रेज वहां क्यों है ? क्यों उनके बाबत यह किवदंती है कि पाकिस्तान सरकार ने एक बार कहा था कि हमें लता जी दे दो और बदले में कश्मीर ले लो ? बेशक ऐसा नहीं हुआ होगा मगर यह तो दुनिया देख ही रही है कि लता जी के निधन पर पाकिस्तान भी शोक ग्रस्त है । वैसे पाकिस्तान के दुख को यूं भी समझा जा सकता है कि उनके पास उम्दा गायिकाएं हैं ही नहीं । ले देकर नूरजहां से उन्होंने काम चलाया और उन्हें भी मुंबई से आयात किया गया था । रेशमा जैसी गायिकाएं लोक गीतों तक ही सीमित रहीं और अपने मनोभावों को सुर लय में बंधा देखने के लिए पाकिस्तान वालों को लता मंगेशकर की शरण में आना पड़ा । वैसे देखा जाए तो लता जी के योगदान का एक पहलू यह भी है ।

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