कपड़े बदल -चेहरा बदल

रवि अरोड़ा
भारत ने कोविड टीकाकरण में सौ करोड़ की बेमिसाल उपलब्धि हासिल की है .. कोविड के अनुरूप व्यवहार का पालन करें..। बताने की जरूरत नहीं यह रिकॉर्ड आप दिन में कई बार सुनते ही होंगे । जब भी किसी को फोन लगाओ , पहले यह सरकारी पैगाम सुनना ही पड़ता है । मगर मुझे पूरी उम्मीद है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने यह रिकॉर्ड कभी नही सुना होगा । सुनें भी तो भला कैसे , उनके पास तो फोन मिलाने के लिए भी अलग से स्टाफ होगा । वैसे क्या ही अच्छा हो यदि किसी दिन वे खुद ही किसी को अपने मोबाइल से फोन करें और अपनी ही सरकार का यह संदेश पूरा सुन लें । हो सकता है कि अपना ही यह संदेश जब उनके कानों में पड़े तो वे आत्ममंथन भी करें कि क्या वे स्वयं भी कोविड के अनुरूप व्यवहार का पालन कर रहे हैं ? योजनाओं के उद्घाटनों और शिलान्यासों के बहाने आजकल उत्तर प्रदेश में जो वे ताबड़तोड़ रैलियां कर अपार भीड़ जुटा रहे हैं , उसे देखते हुए तो कम से कम यही लगता है ।

यह खबर पढ़ कर अच्छा लगा कि प्रधानमंत्री ने कोविड के नए स्वरूप ओमिक्रॉन के भारत पर मंडरा रहे खतरे को लेकर एक बार फिर समीक्षा बैठक की है । इन बैठकों में मोदी जी खूब चिंतित भी दिखते हैं मगर उनकी यह चिंता क्या वाकई सच्ची है ? अक्तूबर से लेकर आज तक वे तेरह बार उत्तर प्रदेश का दौरा कर चुके हैं और हर बार एक बड़ी भीड़ को भी संबोधित करते हैं । जाहिर है कि भीड़ में कोविड के अनुरूप व्यवहार की बात तो सोचना भी फजूल है । उनके दौरों का यह सिलसिला चुनाव की घोषणा से पूर्व ही जब इतना जबरदस्त है तो अंदाजा लगाइए कि चुनावी रैलियों में वे क्या करेंगे । जब खुद प्रधानमंत्री ऐसा कर रहा है तो अन्य दलों के नेताओं की कोई क्या बात करे । यह स्थिति तो तब है जबकि खुद सरकार ही मान रही है कि कोविड का यह नया स्वरूप पुराने स्वरूप से तीन गुना अधिक तेजी से फैलता है । चूंकि मोदी जी उत्तरप्रदेश से ही चुन कर संसद में गए हैं अतः उन्हें अच्छी तरह पता होगा कि दूसरी लहर में कोरोना ने यहां कितनी तबाही मचाई थी । मरने वालों को श्मशान घाटों में भी जगह नहीं मिली थी । अनगिनत लाशें गंगा में तैरती मिली थीं अथवा नदी किनारे रेत में दबी हुई । अस्पतालों में जगह नहीं थी और लोगबाग आक्सीजन की कमी से तड़प तड़प कर जान दे रहे थे । अब बेशक मरीजों , मृतकों, अस्पतालो और आक्सीजन संबंधी कोई भी दावा सरकार संसद और विधान सभा में करे मगर सच्चाई तो उन सीनों में ताउम्र जिंदा ही रहेगी , जिन्होंने उस खौफनाक दौर को झेला है ।

मुझे कई बार लगता है कि नरेंद्र मोदी एक नहीं दो आदमी हैं । एक वह है जो दिल्ली की बैठकों में कोविड पर गंभीर मुद्राएं बनाता है और कोविड के अनुरूप व्यवहार की हमसे अपील करता है । दूसरा वह है जो अपनी रैलियों में अपार भीड़ देख कर हर्षित होता है । साल के शुरू में पश्चिमी बंगाल समेत पांच राज्यों के चुनावों में भी मोदी जी अपने इन्ही दो चेहरों के साथ हमारे बीच थे । अब अगले साल के शुरू में होने जा रहे पांच अन्य राज्यों के चुनावों में भी वे सुबह हमसे कोविड के अनुरूप व्यवहार के पालन की अपील करेंगे और शाम को अपनी सभाओं में अपार भीड़ को देख कर खुशी के मारे दोहरे हुए जाएंगे । कपड़ों में साथ साथ बार बार चेहरे बदलने की भी यह अदा कमाल की है ।

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