इल्तिज़ा

रवि अरोड़ा

पिछले साल इन्हीं दिनो मित्र मंडली के साथ अमरनाथ की यात्रा पर गया था । पूरे चार दिन कश्मीर में रहे मगर मजाल है कि अमरनाथ के अतिरिक्त कहीं जा पाये हों । दरअसल हमारे पहलगाम पहुँचने के तीन दिन बाद ही कुख्यात आतंकी बुरहान वानी की डेथ एनीवर्सरी थी और पूरी घाटी का माहौल तनावपूर्ण था । पहलगाम पहुँचने के अगले ही बर्फ़ानी बाबा के दर्शन को निकल गए और रात में आकर थक कर सो गए । अगले दिन सुबह उठकर श्रीनगर और पहलगाम घूमने का कार्यक्रम बना ही रहे थे कि हमारे होटल में आए एक पुलिस अफ़सर ने बताया कि कश्मीर से वापिस लौटना है तो तुरंत ही निकल जाओ वरना यहाँ कर्फ़्यू लगने ही वाला है और फिर पता नहीं कब वापिस जा पाओगे। बस उसी समय मन में तय कर लिया कि आज के बाद अपनी तो कश्मीर को नमस्ते , दोबारा यहाँ पैर भी नहीं रखूँगा । मगर अब मोदी और अमित शाह की जोड़ी ने कश्मीर को लेकर जो एतिहासिक फ़ैसला लिया है उसने मुझ जैसे सामान्य नागरिक के मन में भी आशा कि एक किरण सी जग गई है । लगा है कि कश्मीर अभी भी हमारा है ।

ख़ैर पहले अपनी यात्रा कि बात पूरी करता हूँ । डरे सहमे हम लोग तुरंत ही टैक्सी स्टैंड दौड़े और जम्मू जाने के लिए कोई कार किराये पर लेनी चाही मगर कोई भी स्थानीय टैक्सी ड्राईवर जम्मू जाने के लिए तैयार नहीं हुआ । निराश होटल लौट ही रहे थे कि तभी सड़क पर जम्मू का एक़ टैक्सी वाला मिला । उसे जैसे तैसे हमने तैयार किया मगर उसकी शर्त थी कि बिना कोई समय गँवाए गाड़ी में तुरंत बैठना होगा और अनंतनाग पार करने तक मैं किसी भी सूरत रास्ते में गाड़ी नहीं रोकूँगा । उसने यह भी शर्त रखी कि पहलगाम-जम्मू राजमार्ग पर यदि फ़ौज ने रास्ता बंद कर रखा हो तो हमें अपने आप वापिस आना होगा ।डर का एसा माहौल हवाओं में था कि बिना कुछ खाए-पीए बग़ैर नहाए-धोए हम लोग झटपट टैक्सी में सवार हो गए । मूलतः जम्मू का ही रहने वाला वह टैक्सी ड्राईवर हिन्दू था और उसने गाड़ी के डैशबोर्ड पर तिरंगा झंडा और वैष्णो देवी की तस्वीर भी लगा रखी थी । बक़ौल उसके आर्मी के लोग गाड़ी रोकें तो यह देख कर आसानी से जाने देते हैं मगर स्थानीय टैक्सी ड्राईवर यह देख कर नाराज़ हो जाते हैं और इसी वजह से एक बार उसकी बुरी तरह पिटाई भी कर चुके हैं ।

शर्त के अनुरूप ड्राईवर ने जम्मू की सीमा में प्रवेश करने से पहले कहीं भी गाड़ी नहीं रोकी । रास्ते में चप्पे चप्पे पर सीआरपीएफ और सेना के जवान दिखाई दिए । लगभग सौ किलोमीटर तक शायद ही एसा हुआ हो कि हाथ में आधुनिक हथियार लिए कोई जवान नज़रों के सामने न हो । हमारी गाड़ी शौपियां के पास से भी गुज़री । वहाँ एक जगह से गहरा धुआँ उठ रहा था । ड्राईवर ने बताया कि कल रात से यहाँ आतंकियों से मुठभेड़ चल रही है और पिछले एक हफ़्ते में तीन बड़ी मुठभेड़ हो चुकी हैं । ख़ैर जब तक जम्मू की सीमा तक नहीं पहुँचे तब तक साँस अटकी रही । हम समझ नहीं पा रहे थे कि हम अपने ही देश में हैं अथवा सीरिया जैसे किसी मुल्क में । धरती का स्वर्ग कहा जाने वाला कश्मीर क्या यही है ? आख़िर इस स्वर्ग को भारत में मिला कर हमें हासिल क्या हुआ ? पिछले तीस साल में हुई आतंकी वारदातों में अब तक बयालिस हज़ार लोग मारे जा चुके हैं । हज़ारों जवान शहीद हुए हैं । अरबों रुपये हम कश्मीर पर लुटा चुके हैं और बदले में हमें मिल क्या रहा है ? यही कि हमारा कोई नागरिक चैन से अपने ही मुल्क के इस हिस्से में एक दिन रुक भी न सके ? अलगाव की बात करने वाले इन कश्मीरियों को भी इन तीस सालों में क्या मिला , घर घर लाशें , ग़ुरबत और ज़हालत ?

मुझे नहीं मालूम कि हमारे नेताओं ने किस मनःस्थिति में कश्मीर को धारा 370 के तहत विशेष दर्जा दिया था मगर ज़मीनी हक़ीक़त तो यह है कि यह पूरी तरह साबित हो चुका है कि यह बेवक़ूफ़ी भरा फ़ैसला था और उसकी क़ीमत कश्मीर और पूरे भारत ने चुकाई । आज जब इसे बेअसर कर दिया गया है तो सवाल उठता ही है कि पहले की सरकारों ने एसा क्यों नहीं किया ? माना मोदी जी कठोर फ़ैसले लेने से नहीं हिचकते मगर कठोर फ़ैसले तो इंदिरा गांधी भी लेती थीं । सन 1971 में पाकिस्तान के दो टुकड़े करने और सिख आतंकियों के समूल विनाश को स्वर्ण मंदिर में टैंक भेज कर उन्होंने यह साबित भी किया था । फिर एसा करने की हिम्मत किसी ने क्यों नहीं दिखाई ? इस यक्ष प्रश्न का उत्तर इतिहास देश के तमाम पूर्व प्रधानमंत्रियों से अवश्य पूछेगा । हालाँकि ताज़ा हालात को लेकर तमाम आशंकाएँ व्यक्त की जा रही हैं । कहा जा रहा है कि कश्मीर में आतंकवाद और विस्तार लेगा मगर इससे ज़्यादा भी क्या होगा कि ग़ैर कश्मीरी भारतीय वहाँ जा ही न पाए और यदि चला जाये तो उसे हमारी तरह भूखा-प्यासा वापिस दौड़ा दिया जाए । मोदी जी आपने बिलकुल ठीक किया । यक़ीनन आप साधुवाद के पात्र हैं । आज पूरा देश आपके साथ है बस एक छोटी सी इल्तिजा है कि कश्मीर के साथ कश्मीरियों को भी अपना समझना और हमें कश्मीर के साथ कश्मीरियों से भी जोड़ना ।

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