आज शहर में

चौराहों के फव्वारे उछल रहे हैं हवा में
लगता है कोई बड़ा आदमी आया है
आज शहर में
चप्पे चप्पे पर ऐंठ रही है पुलिस
लगता है कोई बड़ा आदमी आया है
आज शहर में
सड़कों के किनारे मुस्कुरा रहे हैं पुत कर
लगता है कोई बड़ा आदमी आया है
आज शहर में
तमाम गंदगी को ढकने के जतन में हैं हरे पर्दे
लगता है कोई बड़ा आदमी आया है
आज शहर में
धूल के जर्रे जर्रे पर है छिड़काव की जोर आजमाइश
लगता है कोई बड़ा आदमी आया है
आज शहर में
सुबह से भिखारी दिखा नहीं कोई
लगता है कोई बड़ा आदमी आया है
आज शहर में
न जानें कहां बिला गए
मुफलिसों की खातिर लगने वाले भंडारे
लगता है कोई बड़ा आदमी आया है
आज शहर मे
हाथ ठेली और रिक्शा भी हैं शायद कहीं कैद
लगता है कोई बड़ा आदमी आया है
आज शहर में
कुछ खायेंगे बढ़िया खाना आज
वीआईपी बाड़े में बैठ कर
किसी का होगा उपवास
लगता है कोई बड़ा आदमी आया है
आज शहर में
रवि अरोड़ा

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