अपनी प्रजा को पहचानो राजा जी

रवि अरोड़ा
मैं शर्त लगा सकता हूँ कि कोरोना वायरस से भी अधिक तेज़ी से अफ़वाहें फैलती हैं । कम से कम हमारे देश का तो यही सत्य है । यही नहीं कोरोना की तरह अफ़वाहें भी जाति , धर्म, उम्र और लिंग का भेद नहीं करतीं । समभाव की नज़र से देखें तो कुछ कुछ आध्यात्मिक सी भी लगती हैं ये अफ़वाहें । अब आज का ही उदाहरण देख लीजिये । पता नहीं कहाँ से यह अफ़वाह उड़ गई कि उत्तर प्रदेश के पंद्रह जिले आज रात बारह बजे से पूरी तरह सील हो जाएँगे और कहीं कोई दुकान नहीं खुलेगी , आपको कुछ भी चाहिये तो आप हेल्पलाईन पर फ़ोन करें, प्रशासन वह सामान आपके घर भिजवा देगा । अब अपनी सरकारों पर तो हम लोगों का भरोसा कभी होता ही नहीं सो पब्लिक टूट पड़ी दुकानों पर । दो घंटे में बाज़ार का अधिकांश माल ग़ायब हो गया और बहती गंगा में हाथ धोने वालों ने जम कर मौज काटी और सौ रुपये की चीज़ डेड अथवा दो सौ में बेची ।
बड़ी हैरानी की बात है कि हमारी सरकारें भी हमें अभी तक नहीं समझ पाईं । पंद्रह जिलों को सील करने की ख़बर पता नहीं क्यों उसने एक साथ तमाम मीडिया को पूरी जानकारी के साथ जारी नहीं की । सबसे तेज़ दिखने के चक्कर में टेलिविज़न चैनलों पर पट्टी चल गई कि पंद्रह जिले सील होंगे और हमारे सोशल मीडिया वीर इस ख़बर को ले उड़े । उन्होंने इस ख़बर में एसा तड़का लगाया कि पब्लिक सब कुछ छोड़ छाड़ कर आस पास की दुकानों पर टूट पड़ी । फल वाले के सारे फल बिक गये और सब्ज़ी वाले की सब्ज़ी । किराना और मेडिकल स्टोर पर देर शाम तक लाईन लगी रही । दुकानदार भी लाट साहब की तरह व्यवहार करने लगे और उनका बर्ताव एसा हो गया जैसे मुफ़्त में सामान दे रहे हों । तुर्रा यह कि इस पर सारा माल बिक गया । जिसे कुछ नहीं चाहिए वह भी माहौल देखने बाज़ार पहुँच गया । ज़रूरी सामान से जिनके घर भरे पड़े हैं वे भी लाईन में लग गए कि कहीं कुछ कम न पड़ जाए । पुलिस लोगों को समझाती रही कि सोशल डिसटेंसिंग बनाये रखिए । एसा कुछ नहीं हुआ है जैसा आप सोच रहे हैं । कोई कर्फ़्यू नहीं लग रहा और न ही शहर सील किया जा रहा है । डीएम और एसएसपी ने भी अलग से वीडियो जारी कर स्थिति स्पष्ट की मगर एसे में कौन किसकी सुनता है ?
वैसे आप माने या न माने मगर यह भी सरकार का फ़ेलियर ही था । राजनीति में शीर्ष पदों पर पहुँचने वाले अपने मुँह से निकाले गए एक एक शब्द की गूँज महसूस क्यों नहीं करते ? उन्हें क्यों पता नहीं चलता कि वो थाली बजाने को कहेंगे तो हम सड़कों पर निकल कर ढोल बजाने लगेंगे । वो दीया जलाने को कहेंगे तो हम पटाखे फोड़ेंगे । वही इस बार हुआ उन्होंने कहा प्रभावित इलाक़े सील होंगे और हमने समझ लिया सब कुछ सील होगा और बंदर की तरह बाज़ारों में गुलाटियाँ मारनी शुरू कर दीं । कभी इस दुकान पर तो कभी इस दुकान पर । सबसे अधिक दयनीय स्थिति में तो नशेड़ी दिखे । सरकार सबसे अधिक टेक्स उन्ही के माल पर लगाती है और दुकानसार भी सबसे ज़्यादा उन्हें लूटते हैं। आज राज नगर में शाम को तीन सौ रुपए वाली सिगरेट की डिब्बी आठ सौ में और पचास वाली पान मसाले की पुड़िया दो सौ में बिकी । शराब की दुकाने पहले ही बंद हैं । कभी कभी तो लगता है कि नशेड़ी वर्ग ही समाज का सबसे निरीह वर्ग है ।अफ़वाह का असर भी सबसे ज़्यादा आज इनकी जेब पर हुआ ।

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